जालंधर, पंजाब – “उम्र सिर्फ एक नंबर है, जुनून ही सब कुछ है।” यह कथन जीवंत कर दिखाया था fauja singh ने, जिन्होंने 89 साल की उम्र में मैराथन दौड़ना शुरू किया और 114 वर्ष तक दुनिया को हैरान करते रहे।fauja singh 11 अक्टूबर, 2023 को पंजाब के जालंधर में एक सड़क हादसे ने इस लीजेंड को हमसे छीन लिया, fauja singh लेकिन उनकी अमर प्रेरणा हमेशा जीवित रहेगी।
वह दुखद दिन: हादसे की पूरी कहान
सुबह की सैर पर निकले fauja singh जालंधर के नकोदर रोड पर सड़क पार कर रहे थे कि एक तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। fauja singh स्थानीय अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने इस घटना पर “गहरा दुख” व्यक्त करते हुए कहा:
“उनका जीवन मानव सामर्थ्य का प्रतीक था। वह न सिर्फ पंजाब, बल्कि पूरी मानवजाति के लिए प्रेरणा थे।”
पंजाब राज्यपाल का बयान (टाइम्स ऑफ इंडिया)
जीवन यात्रा: खेतों से मैराथन तक का सफर
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शुरुआती जीवन (1911-1990):
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जन्म: 1 अप्रैल 1911, बीस पिंड (अब पाकिस्तान)।
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बचपन से ही चलने में रुचि, लेकिन गरीबी के कारण खेती में लग गए।
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81 साल की उम्र तक पंजाब के गाँवों में साधारण जीवन जिया।
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जीवन का मोड़ (1992):
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पत्नी और बेटे की मृत्यु के बाद यूके के बेटे के पास चले गए।
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अकेलेपन से लड़ने के लिए 89 साल में पहली बार दौड़े। कोच हरमिंदर सिंह ने उनकी प्रतिभा पहचानी।

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इतिहास रचते पल:
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2000: लंदन मैराथन (6 घंटे 54 मिनट) में पूरा कर विश्वभर में सुर्खियाँ बटोरीं।
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2003: टोरंटो वाटरफ्रंट मैराथन (5 घंटे 40 मिनट) में 100+ आयु वर्ग का विश्व रिकॉर्ड।
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2011: लंदन मैराथन (8 घंटे 25 मिनट) पूरा कर दुनिया के सबसे उम्रदराज धावक बने।
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रहस्य क्या था? Fauja Singh की फिटनेस का मंत्र
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आहार: शाकाहारी भोजन (दलिया, दाल, हरी सब्जियाँ), चाय से परहेज।
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दिनचर्या: सुबह 4 बजे उठना, 10 किमी पैदल चलना, योग।
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मानसिकता:
“नकारात्मक लोगों से दूर रहो। खुश रहो, मुस्कुराओ और दौड़ो!”
उनका जीवन इस बात का सबूत था कि उम्र बाधा नहीं है। फौजा सिंह की जीवनशैली (विकिपीडिया)
वैश्विक प्रतिक्रिया: दुनिया ने क्या कहा?
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गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: “उन्होंने उम्र की सीमाएँ ध्वस्त कीं।”
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ब्रिटिश प्रधानमंत्री रिशी सुनक: “वह यूके के प्रिय थे, जहाँ उन्होंने 20 साल बिताए।”
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भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन: “उनका जाना भारतीय खेलों के लिए अपूरणीय क्षति है।”
वैश्विक प्रतिक्रियाएँ (एनडीटीवी)
प्रेरणा के पल: वो रिकॉर्ड जो इतिहास बन गए
| वर्ष | आयु | आयोजन | उपलब्धि |
|---|---|---|---|
| 2003 | 92 | टोरंटो मैराथन | 100+ वर्ष वर्ग में विश्व रिकॉर्ड |
| 2011 | 100 | लंदन मैराथन | सबसे उम्रदराज फिनिशर |
| 2012 | 101 | हांगकांग मैराथन | 10 किमी रेस में स्वर्ण पदक |
| 2013 | 102 | ग्लासगो मैराथन | अंतिम प्रतिस्पर्धी दौड़ |
दौड़ से आगे: वह संदेश जो अमर हो गया
fauja singh सिर्फ एक धावक नहीं थे—वह सांस्कृतिक प्रतीक थे:
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धर्मों का मेल: सिख पगड़ी और “singh” (शेर) उपनाम के साथ वह सार्वभौमिक एकता का प्रतीक थे।
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चैरिटी: दौड़ के जरिए अल्जाइमर रिसर्च के लिए £1 लाख से अधिक जुटाए।
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ग्लोबल आइकन: नाइकी ने उन पर “दूसरों से अलग” कैंपेन चलाया।

सबक: Fauja Singh से जीवन के 3 सूत्र
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कभी देर नहीं होती: सपने देखने की कोई उम्र नहीं।
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स्वास्थ्य है संपत्ति: सादा जीवन, संयमित आहार, नियमित व्यायाम।
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देना ही जीना है: “खुशियाँ बाँटो, दौड़ केवल जीतने के लिए नहीं होती।”
अंतिम विदाई: श्रद्धांजलियों का सैलाब
जालंधर में उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए। उनके पोते सुखबीर सिंह ने कहा:
“दादाजी ने सिखाया कि मौत जीवन का अंत नहीं—प्रेरणा बनकर अमर होने का रास्ता है।”